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Showing posts from August, 2024

गजानन जागीरदार

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#13aug  #02april  गजानन जागीरदार 🎂02 अप्रैल 1907 अमरावती , मध्य प्रांत और बरार , ब्रिटिश भारत ⚰️13 अगस्त 1988  (आयु 81) बम्बई , महाराष्ट्र , भारत व्यवसाय अभिनेता, पटकथा लेखक, निर्देशक एक अनुभवी भारतीय फिल्म निर्देशक, पटकथा लेखक और अभिनेता थे। उन्होंने हिंदी सिनेमा , जिसे बॉलीवुड भी कहा जाता है , के साथ-साथ मराठी सिनेमा में भी काम किया। 1942 से 1947 की अवधि में प्रभात फिल्म्स के साथ एक फिल्म निर्देशक के रूप में उनका उदय हुआ ।उन्हें 1960 में भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (FTII) का पहला निदेशक (तब प्रिंसिपल) नियुक्त किया गया था, जिसे तब भारतीय फिल्म संस्थान के नाम से जाना जाता था। जागीरदार ने 1961 से 1962 तक, लगभग एक साल तक FTII के निदेशक के रूप में कार्य किया। FTII में अपनी भूमिका से तीन दशक पहले वे प्रभात फिल्म कंपनी से जुड़े थे, जब परिसर प्रभात का आधार था। वह स्टैनिस्लावस्की के अभिनय सिद्धांतों को प्रचलित स्थानीय परिस्थितियों में लागू करने वाले एक प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री बन गए। 1962 के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में उनकी फिल्म वैजयंत को दूसरी सर्वश्रेष्ठ मराठी फीचर फ...

प्रसिद्ध गीतकार जी एस नेपाली उर्फ गोपाल सिंह नेपाली

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#11aug  #17april  प्रसिद्ध गीतकार जी एस नेपाली उर्फ गोपाल सिंह नेपाली 11 अगस्त 1911 ई॰ को बिहार के पश्चिमी चम्पारन , बेतिया ⚰️17 अप्रैल 1963 ई॰  बिहार के भागलपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या पांच  कलम की स्वाधीनता के लिए आजीवन संघर्षरत रहे 'गीतों के राजकुमार' गोपाल सिंह नेपाली लहरों की धारा के विपरीत चलकर हिन्दी साहित्य, पत्रकारिता और फिल्म उद्योग में ऊंचा स्थान हासिल करने वाले छायावादोत्तर काल के विशिष्ट कवि और गीतकार थे। बिहार के पश्चिम चम्पारण जिले के बेतिया में 11 अगस्त 1911 को जन्मे गोपाल सिंह नेपाली की काव्य प्रतिभा बचपन में ही दिखाई देने लगी थी। एक बार एक दुकानदार ने बच्चा समझकर उन्हें पुराना कार्बन दे दिया जिस पर उन्होंने वह कार्बन लौटाते हुए दुकानदार से कहा- 'इसके लिए माफ कीजिएगा गोपाल पर, सड़ियल दिया है आपने कार्बन निकालकर'। उनकी इस कविता को सुनकर दुकानदार काफी शर्मिंदा हुआ और उसने उन्हें नया कार्बन निकालकर दे दिया। साहित्य की लगभग सभी विधाओं में पारंगत नेपाली की पहली कविता 'भारत गगन के जगमग सितारे' 1930 में रामवृक्ष बेनीपुरी द्वारा संपादित बाल पत...

गुलशन बावरा

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#07aug #12april गुलशन कुमार मेहता प्रसिद्ध नाम गुलशन बावरा 🎂12 अप्रैल, 1937 जन्म भूमि शेखपुरा, अविभाजित पंजाब ⚰️ 07 अगस्त, 2009 मृत्यु स्थान मुम्बई, महाराष्ट्र कर्म भूमि भारत मुख्य फ़िल्में 'सट्टा बाज़ार', 'जंजीर', 'उपकार', 'परिवार', 'कस्मे वादे', 'सत्ते पे सत्ता', 'अगर तुम न होते', 'हाथ की सफाई', 'सनम तेरी कसम', 'हकीकत', 'ये वादा रहा' आदि। पुरस्कार-उपाधि 'फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार' (1967) प्रसिद्धि हिन्दी फ़िल्म गीतकार। नागरिकता भारतीय संबंधित लेख राहुल देव बर्मन, कल्याणजी आनंदजी, मनोज कुमार, किशोर कुमार। अन्य जानकारी राहुल देव बर्मन गुलशन बावरा के पड़ोसी थे। राहुल जी के साथ उनकी कई यादें जुड़ी हुई थीं। इन यादों को गुलशन बावरा ने 'अनटोल्ड स्टोरीज' नाम की एक सीडी में संजोया था। इसमें उन्होंने पंचम दा की आवाज़ रिकार्ड की थी और कुछ गीतों के साथ जुड़े किस्से-कहानियाँ भी प्रस्तुत किये थे। हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध गीतकार थे। उनका मूल नाम गुलशन कुमार मेहता था। उन्हें 'बावरा' का उपना...

वजाहत मिर्ज़ा

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#04aug  #20april  वजाहत मिर्ज़ा  🎂20 अप्रैल 1908 सीतापुर , आगरा और अवध का संयुक्त प्रांत , ब्रिटिश भारत ⚰️04 अगस्त 1990 (आयु 82) मुंबई , महाराष्ट्र , भारत व्यवसाय संवाद लेखक, पटकथा लेखक , कहानीकार, फिल्म निर्देशक सक्रिय वर्ष 1933 – 1980 पुरस्कार फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ संवाद पुरस्कार (1960) फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ संवाद पुरस्कार (1961) मुगल-ए-आज़म, गंगा जमुना जैसी सुपरहिट फिल्मों के संवाद लिखने वाले महान पटकथा एवं संवाद लेखक फ़िल्म निर्देशक वजाहत मिर्ज़ा  कहा जाता है कि फ़िल्में कला की सबसे श्रेष्ठ माध्यम होती हैं. इनमें संगीत, अदाकारी, लेखन इत्यादि सभी प्रकार की कलाओं का संगम होता है. यदि किसी फिल्म का कोई एक पक्ष भी कमजोर पड़ता है, तो इससे पूरी फिल्म पर प्रभाव पड़ता है. अक्सर हम देखते हैं कि दर्शक केवल फिल्मों के नायक-नायिकाओं को ही तवज्जो देते हैं. किसी भी फिल्म में नायक और नायिकाओं से इतर भी बहुत कुछ होता है. एक नायक या नायिका द्वारा बोले गए संवाद कोई लेखक लिखता. उनके अभिनय करने और संवाद बोलने का तरीका एक पटकथा लेखक तय करता. तब कहीं जाकर वे दर्शकों के दिलों में अपना घर...

शशि कला

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#03aug #04april  शकीला नाम शशिकला 🎂03 अगस्त, 1933 जन्म भूमि शोलापुर, महाराष्ट्र ⚰️04 अप्रॅल, 2021 मृत्यु स्थान मुम्बई, महाराष्ट्र पति/पत्नी ओम सहगल कर्म भूमि भारत कर्म-क्षेत्र हिन्दी सिनेमा मुख्य फ़िल्में 'नौ दो ग्यारह', 'जंगली', 'हरियाली और रास्ता', 'ये रास्ते हैं प्यार के', 'गुमराह', 'हिमालय की गोद में', 'फूल और पत्थर', 'घर घर की कहानी', 'दुल्हन वही जो पिया मन भाये', 'सरगम', 'क्रांति', 'घर घर की कहानी', 'कभी खुशी कभी ग़म' आदि। पुरस्कार-उपाधि 'पद्मश्री' (2007), फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार (दो बार), 'बंगाल जर्नलिस्ट अवार्ड' प्रसिद्धि अभिनेत्री नागरिकता भारतीय अन्य जानकारी सन 1960 के दशक में शशिकला ने 'हरियाली और रास्ता', 'गुमराह', 'हमराही', 'फूल और पत्थर', 'दादी मां', 'हिमालय की गोद में', 'छोटी सी मुलाक़ात', 'नीलकमल', 'पैसा या प्यार' जैसी कई फ़िल्मों में बेहतरीन निगेटिव भूमिकाएं की थीं। ●▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬●   ꧁...

शकील बदायुनी

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#03aug  #20april  शकील बदायुनी 🎂03 अगस्त 1916,  बदायूँ ⚰️ 20 अप्रैल 1970,  मुम्बई माता-पिता: Mohammed Jamaal Ahmed Sokhta Qadiri शकील बदायूनी मसऊदी का जन्म स्थान उत्तर प्रदेश का शहर बदायूँ है। यह एक उर्दू के शायर और साहित्यकार थे। लैकिन इन्होंने बालीवुड में गीत रचनाकार के रूप में नाम कमाया। शकील बदायूंनी का जन्म उत्तर प्रदेश के बदायूं में हुआ था । उनके पिता मोहम्मद जमाल अहमद सोख्ता कादिरी चाहते थे कि उनका करियर सफल हो, इसलिए उन्होंने शकील के लिए घर पर ही अरबी , उर्दू , फ़ारसी और हिंदी की ट्यूशन की व्यवस्था की। शायरी के प्रति उनका झुकाव दूसरे शायरों की तरह वंशानुगत नहीं था । उनके दूर के रिश्तेदारों में से एक जिया-उल-कादिरी बदायूंनी एक धार्मिक शायर थे । शकील मसूदी उनसे प्रभावित थे और बदायूं के समकालीन माहौल ने उन्हें शायरी की ओर प्रेरित किया। जब उन्होंने 1936 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया , तो उन्होंने अंतर-कॉलेज, अंतर-विश्वविद्यालय मुशायरों या कविता पाठ संगोष्ठियों में भाग लेना शुरू कर दिया और अक्सर जीत हासिल की। ​​1940 में, उन्होंने सलमा से शादी क...

गीत कार रमेश शास्त्री

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#02aug  #30april  गीत कार रमेश शास्त्री 🎂02 अगस्त 1935 ⚰️30 अप्रैल 2010  गीतकार रमेश शास्त्री के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं है, जिनका हिंदी सिनेमा में यादगार करियर रहा, हालाँकि यह बहुत छोटा रहा। यह सब तब शुरू हुआ जब अभिनेता-फिल्म निर्माता राज कपूर अपनी दूसरी फिल्म बरसात (1949) बना रहे थे , और उन्होंने प्रतिभाओं को आकर्षित करने का एक नया तरीका सोचा। उन्होंने अखबारों में एक विज्ञापन दिया जिसमें कहा गया था कि वह अपनी अगली परियोजना के लिए गीतों की तलाश में हैं। बंबई की चकाचौंध से दूर बनारस में संस्कृत के एक युवा विद्वान रमेश शास्त्री ने विज्ञापन पढ़ा और कुछ गीत भेजे, जिनमें से एक अमर गीत 'हवा में उड़ता जाए' था। यह गीत चुना गया और लता मंगेशकर द्वारा गाया गया, यह अब तक के सबसे यादगार गीतों में से एक बन गया। बरसात एक ब्लॉकबस्टर हिट साबित हुई, जिसने हिंदी सिनेमा की पहली ब्लॉकबस्टर, ज्ञान मुखर्जी की किस्मत (1943) के बॉक्स-ऑफिस कलेक्शन के आंकड़ों को तोड़ दिया , जिसमें अशोक कुमार और मुमताज शांति ने मुख्य भूमिका निभाई थी। बरसात की सफलता का एक बड़ा हिस्सा इसके सुपरहिट गानों को दिय...