जतिंदर

#07april 
जतिंदर
: 07 अप्रैल 1942 , अमृतसर
पत्नी: शोभा कपूर (विवा. 1974)
बच्चे: तुषार कपूर, एकता कपूर
माता-पिता: कृष्णा कपूर, अमरनाथ कपूर
भाई: प्रसन कपूर, लक्ष्मी सोबती
जितेंद्र नाम से प्रसिद्ध है,अगर इनके नाम की  बात की जाए तो जितेंद्र नाम से फिल्म जगत का एक अभिनेता प्रसिद्ध है, जो 70 और 80 के दशक में हिंदी फिल्म जगत में बेहद प्रसिद्ध अभिनेता रहे थे। उनका वास्तविक नाम रवि कपूर था लेकिन फिल्मों में वह जितेंद्र नाम से प्रसिद्ध हुए। जितेंद्र की पहली फिल्म का नाम गीत गाया पत्थरों ने था।
जितेन्द्र का जन्म पंजाब के अमृतसर मे हुआ था। वे बचपन से मुंबई मे पले बढ़े थे। उनकी पत्नी का नाम शोभा कपूर हैं तथा पुत्र तुषार कपूर भी हिंदी सिनेमा के अभिनेता है। उनकी पुत्री एकता कपूर टेलीविजन धांरावाहिक एवं फिल्म निर्माता हैं उनकी प्रोडक्सन कंपनी का नाम बालाजी टेलिफिल्म्स है।
जितेंद्र भारतीय सिनेमा जगत के जाने माने दिग्दर्शक और फिल्म निर्माता वी.शांताराम जी के सहायक (असिस्टंट) रहे है। उन्होंने जया प्रदा, श्री देवी के साथ ज्यादातर फिल्में की है।

जितेंद्र  हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता, फ़िल्म निर्माता, बालाजी टेलीफ़िल्म्स, बालाजी मोशन पिक्चर्स और ए.एल.टी एंटरटेनमेंट के अध्यक्ष हैं। वह भारतीय सिनेमा में अपनी नृत्य कला के लिए जाने जाते हैं। उनका वास्तविक नाम रवि कपूर है। उन्होंने अपने फ़िल्मी कॅरियर की शुरुआत 1959 में प्रदर्शित वी. शांताराम की फ़िल्म ‘नवरंग’ से की, जिसमें उन्हें छोटी सी भूमिका निभाने का अवसर मिला। अपनी पहचान बनाने का अवसर उन्हें 1964 में वी. शांताराम की फ़िल्म 'गीत गाया पत्थरों ने' से मिला, जिसके बाद उन्हें और भी कई फ़िल्मों में काम करने के अवसर मिले। उन्होंने 250 से भी अधिक फ़िल्मों में काम किया।

परिचय

जितेंद्र का जन्म 7 अप्रॅल, 1942 को अमृतसर, पंजाब के एक जौहरी परिवार में हुआ था। उनके पिता अमरनाथ एवं माता कृष्णा कपूर गहनों के व्यवसाय के अलावा फ़िल्मों में प्रयुक्त होने वाले नकली जेवरों की सप्लाई भी किया करते थे, जिन्हें जितेंद्र विभिन्न फ़िल्मालयों पर जाकर बेचा करते थे। उनका रुझान बचपन से ही फ़िल्मों की ओर था, और वह अभिनेता बनना चाहते थे। वह अक्सर घर से भागकर फ़िल्म देखने चले जाते थे।

विवाह

जितेंद्र जब अपनी पत्नी शोभा कपूर से मिले थे, तब वह केवल 14 वर्ष की थीं। उस समय वह अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करके कॉलेज में गयी थीं। जब वह ब्रिटिश एयरवेज में 'एयर होस्टेस' के रूप में कार्यरत थीं, उस वक्त जितेंद्र 1960-1966 के बीच खुद को एक अभिनेता के रूप में स्थापित करने के लिए संघर्ष कर रहे थे। शोभा जितेंद्र से विवाह करना चहती थीं। उनका ये सपना 1974 में पूरा हुआ। जितेंद्र की दो संतानें हैं, जिनके नाम हैं- एकता कपूर और तुषार कपूर। एकता और तुषार भी टेलीविजन के चर्चित सितारों में शामिल हैं।

फ़िल्मी_शुरुआत

वी. शांताराम की पारखी नज़र का ही कमाल था कि उन्होंने स्टूडियो-दर-स्टूडियो नकली जेवरों की सप्लाई करने वाले रवि कपूर (जितेंद्र) को हिंदी सिनेमा का 'जंपिंग जैक' जितेंद्र बना दिया। लेकिन नकली जेवर बेचने वाले जितेंद्र को असली अभिनेता बनाने के लिए वी. शांताराम को भी कुछ कम पापड़ नहीं बेलने पड़े। अपनी पहली फ़िल्म में एक डायलॉग को सही तरीके से बोलने के लिए जितेंद्र ने इतने रीटेक किए कि शांताराम जैसे शांत स्वभाव वाले निर्देशक भी अपना धीरज खो बैठे। 25 रीटेक के बाद भी जब जितेंद्र सही डायलॉग नहीं बोल पाए तो अंत में हार कर शांताराम ने ग़लत डायलॉग को ही ओके कर दिया और इस तरह जितेंद्र का भी सिनेमा में प्रवेश हो गया। जितेंद्र ने अपने फ़िल्मी कॅरियर की शुरुआत 1959 में प्रदर्शित फ़िल्म 'नवरंग' से की, जिसमें उन्हें छोटी सी भूमिका निभाने का अवसर मिला था।

फ़िल्मी_कॅरियर

एक दिन जितेंद्र फ़िल्मालय पहुंचे, जहां वी. शांताराम की फ़िल्म ‘नवरंग’ की शूटिंग चल रही थी। शांताराम की नज़र जब जितेंद्र पर पड़ी तो उन्होंने उनकी पढ़ाई के बारे में पूछताछ की। बातचीत के दौरान जितेंद्र ने शांताराम से फ़िल्मों में काम करने की अपनी इच्छा को जाहिर किया।
जितेंद्र

शांताराम जितेंद्र के पिता के मित्र थे, इसलिए ना कहकर उन्हें नाराज़ नहीं करना चाहते थे। उनकी इच्छा को देखते हुए शांताराम ने उन्हें 'नवरंग' में हिरोइन संध्या के साथ एक छोटी सी भूमिका दे दी। इस तरह भले ही जितेंद्र की शुरुआत हो गई लेकिन सही मायने में उन्हें 1964 में वी. शांताराम ने फ़िल्म 'गीत गाया पत्थरों ने' से ब्रेक दिया। इस फ़िल्म के बाद जितेंद्र अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गए। वर्ष 1967 में जितेंद्र की एक और सुपरहिट फ़िल्म 'फर्ज' प्रदर्शित हुई। रविकांत नगाइच द्वारा निर्देशित इस फ़िल्म में जितेंद्र ने नृत्य कलाकार की भूमिका निभाई। इस फ़िल्म के बाद जितेंद्र को 'जंपिंग जैक' कहा जाने लगा।

'फर्ज' की सफलता से नृत्य कलाकार के रूप में जितेंद्र की छवि बन गई। इस फ़िल्म के बाद निर्माता व निर्देशकों ने अधिकतर फ़िल्मों में उनकी नृत्य छवि को भुनाया। निर्माताओं ने जितेंद्र को एक ऐसे नायक के रूप में पेश किया जो नृत्य करने में सक्षम है। इन फ़िल्मों में 'हमजोली' और 'कारंवा' जैसी सुपरहिट फ़िल्में शामिल हैं। इस बीच जितेंद्र ने 'जीने की राह', 'दो भाई' और 'धरती कहे पुकार' के जैसी फ़िल्मों में हल्के-फुल्के रोल कर अपनी बहुआयामी प्रतिभा का परिचय दिया। चार दशक के लंबे कॅरियर में जितेंद्र ने 250 से भी अधिक फ़िल्मों मे अभिनय का जौहर दिखाया। बतौर अभिनेता सिनेमा में जितेंद्र का योगदान ये है कि उन्होंने सिनेमा के नायकों को देवदास जैसी छवि से बाहर निकालकर एक मस्तमौला आकार दिया।

प्रेम_सम्बंध

ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी और जितेंद्र क़रीब-क़रीब विवाह के बंधन में बंधने वाले थे। हेमा मालिनी और जितेंद्र एक समय विवाह करने वाले थे लेकिन कुछ वजहों से उनका विवाह नहीं हो सका। फ़िल्म 'दुल्हन' की शूटिंग के दौरान जितेंद्र, हेमा मालिनी को दिल दे बैठे। दोनों ने विवाह करने का फ़ैसला भी कर लिया था। जब इस बात की भनक जितेंद्र की मंगेतर और बचपन की दोस्त शोभा कपूर को लगी तो उन्होंने धर्मेंद्र को हेमा को समझाने की जिम्मेदारी सौंपी। 1974 में 'वारिस' और 'गहरी चाल' जैसी फ़िल्मों में साथ काम कर चुकी यह हिट जोड़ी फ़िल्म 'दुल्हन' के लिए शूटिंग कर रही थी। इस फ़िल्म की शूटिंग के समय दोनों एक-दूसरे के काफ़ी क़रीब आ गए और दोनों ने एक-दूसरे से अपने प्यार का इज़हार कर दिया।

हेमा मालिनी और जितेंद्र की प्रेम कहानी शुरू हुई एक दूसरी प्रेम कहानी की वजह से। अभिनेता संजीव कुमार हेमा मालिनी को पसंद करते थे और वह अपने दोस्त जितेंद्र से ड्रीम गर्ल के लिए अपने प्यार का इज़हार करने के लिए मदद ले रहे थे। हेमा मालिनी ने संजीव कुमार के प्रेम-प्रस्ताव को तो स्वीकार नहीं किया, लेकिन वह जितेंद्र के साथ प्यार में पड़ गईं। बात विवाह तक पहुँच गई। माना जाता है कि हेमा मालिनी विवाह से अंतिम समय पर पीछे हट गईं थी।

प्रमुख_फ़िल्में 

हिंदी सिनेमा की कुछ उल्लेखनीय फ़िल्में- मेरे 'हुजूर', 'खिलौना', 'हमजोली', 'कारंवा', 'जैसे को तैसा', 'परिचय', 'खुशबू', 'किनारा', 'नागिन', 'धरमवीर', 'कर्मयोगी', 'जानी दुश्मन', 'द बर्निंग ट्रेन', 'धर्मकांटा', 'जुदाई', 'मांग भरो सजना', 'एक ही भूल', 'सौतन की बेटी', 'मवाली', 'जिस्टस चौधरी', 'हिम्मतवाला', 'तोहफा', 'धर्माधिकार', 'आशा', 'खुदगर्ज', 'आसमान से ऊंचा', 'मां' जैसी बेहतरीन फ़िल्में जितेंद्र के नाम हैं

जंपिंग_जैक

वर्ष 1967 में रविकांत नगाइच द्वारा निर्देशित जितेंद्र की सुपरहिट फ़िल्म 'फर्ज' प्रदर्शित हुई। इस फ़िल्म में जितेंद्र ने नृत्य कलाकार की भूमिका निभाई। इस फ़िल्म के बाद जितेंद्र को 'जंपिंग जैक' कहा जाने लगा। डांसिंग स्टार की उनकी छवि को ही आगे चलकर मिथुन चक्रवर्ती और गोविंदा जैसे नायकों ने अपनी फ़िल्म में भुनाया और हिंदी सिनेमा में अपनी नृत्य भूमिका से लोगों के पसंदीदा बन गए।

पुरस्कार_और_सम्मान

18वाँ उजाला सिनेमा एक्सप्रेस पुरस्कार- 1998
लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड- 2000
फ़िल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड- 2003
भारतीय सिनेमा का दिग्गज- 2004 - अटलांटिक सिटी (संयुक्त राज्य अमेरिका)
स्क्रीन लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड- 2005
ज़ी सिने पुरस्कार - लाइफटाइम अचीवमेंट के लिए- 2012
लायंस गोल्ड पुरस्कार - 2012 - सबसे सदाबहार रोमांटिक हीरो
🎥
2007 ओम शाँति ओम 
2005 हो जाता है प्यार 
2003 कुछ तो है 
1999 मदर
1997 कॄष्ण अर्जुन 
1997 जज मुज़रिम 
1997 चुप 
1997 धर्म कर्म 
1997 लव कुश
1997 महानता
1996 दुश्मन दुनिया का
1995 जनम कुंडली 
1995 जमाना दीवाना 
1995 कलयुग के अवतार 
1994 उधार की ज़िंदगी 
1994 चौराहा
1995 हम सब चोर हैं 
1994 घर की इज्जत
1993 आज की औरत
1993 आदमी खिलौना है 
1993 गीतांजली 
1993 खलनायिका 
1993 भूकंप
1995 पापी देवता
1993 संतान 
1993 आँसू बने अंगारे
1993 रंग 
1993 तहकीकात 
1993 प्रतीक्षा
1992 माँ 
1992 दिल आशना है 
1992 इंसाफ की देवी
 1991रणभूमि 
1991 शिव राम
1991 सपनों का मन्दिर 
1990 थानेदार 
1990 शेषनाग 
1990 मेरा पति सिर्फ मेरा है
1990 न्याय अन्याय 
1990 ज़हरीले
1990 अमीरी गरीबी 
1990 आज के शहंशाह 
1990 हातिमताई 
1990 तकदीर का तमाशा
1989 आग से खेलेंगे 
1989 सौतन की बेटी 
1989 कसम वर्दी की 
1989 नफ़रत की आँधी
1989 मज़बूर 
1989 आसमान से ऊँचा 
1989 दाव पेच 
1988 तमाचा
1988 मर मिटेंगे 
1988 कंवरलाल 
1988 मुलज़िम 
1988 सोने पे सुहागा 
1987 खुदगर्ज़
1987 औलाद 
1987 मददगार 
1987 इंसाफ की पुकार
1987 अपने अपने
1987 जान हथेली पे
1987 मजाल 
1987 हिम्मत और मेहनत 
1987 सिंदूर
1986 लॉकेट 
1986 सदा सुहागन 
1986 ऐसा प्यार कहाँ
1986 स्वर्ग से सुन्दर
1986 जाल 
1986 सुहागन 
1986 धर्म अधिकारी 
1986 दोस्ती दुश्मनी 
1986 बॉन्ड303
1986 सिंहासन
1986 आग और शोला 
1986 घर संसार
1985 होशियार 
1985 संजोग 
1985 पाताल भैरवी 
1985 निशान 
1985 महागुरु 
1985 बलिदान 
1985 मेरा साथी 
1985 नया बकरा 
1985 सरफ़रोश 
1985 हकीकत
1984 कैदी
1984 तोहफा 
1984 ज़ख्मी शेर 
1984 कामयाब 
1984 यह देश
1984 मकसद 
1984 द गोल्ड मैडल 
1984 हसीयत राम 
1984 अकलमंद 
1983 जस्टिस चौधरी 
1983 मवाली 
1983 प्रेम तपस्या
1983 अर्पण 
1983 जानी दोस्त 
1983 हिम्मतवाला गोल्डन जुबली
1982 रास्ते प्यार के 
1982 मेहंदी रंग लायेगी
1982 अपना बना लो 
1982 इंसान 
1982 दीदार-ए-यार 
1982 जीओ और जीने दो 
1982 फ़र्ज़ और कानून 
1982 सम्राट 
1982 धर्म काँटा
1982 बदले की आग 
1982 अनोखा बंधन 
1982 चोरनी 
1981 प्यासा सावन 
1981 एक ही भूल 
1981 शाका 
1981 मौसंबी नारंगी 
1981 खून और पानी 
1981 वक्त की दीवार
1981 शारदा 
1981 ज्योति 
1981 खून का रिश्ता 
1981 मेरी आवाज़ सुनो 
1981 रक्षा 
1980 ज्योति बने ज्वाला
1980 आशा दीपक 
1980 माँग भरो सजना 
1980 आप के दीवाने 
1980 नीयत 
1980 जल महल 
1980 राम बलराम 
1980 जुदाई 
1980 निशाना
1980 टक्कर
1980 द बर्निंग ट्रेन 
1979 जानी दुश्मन 
1979 लोक परलोक 
1979 लव इन कनाडा 
1979 हम तेरे आशिक हैं
1979 आतिश 
1979 खानदान
1978 दिल और दीवार 
1978 बदलते रिश्ते
1978 स्वर्ग नर्क 
1978 तुम्हारी कसम
1978 कर्मयोगी 
1978 नालायक
1977 अपनापन 
1977 दिलदार 
1977 एक ही रास्ता
1977 प्रियतमा 
1977 जय विजय 
1977 ज़मानत 
1977 किनारा 
1977 धरम वीर
1977 कसम कानून की 
1977 पलकों की छाँव में 
1976 उधार का सिंदूर 
1976 नागिन 
1976 संतान 
1975 खुशबू 
1975 उमर कैद 
1975 रानी और लालपरी 
1975 आखिरी दाव
1974 विदाई 
1974 दुल्हन
1973 गहरी चाल 
1973 जैसे को तैसा 
1973 अनोखी अदा
1972 परिचय 
1972 एक हसीना दो दीवाने 
1972 रूप तेरा मस्ताना 
1972 गरम मसाला 
1972 भाई हो तो ऐसा 
1972 शादी के बाद 
1972 एक बेचारा 
1972 यार मेरा 
1972 सज़ा 
1971 कठपुतली 
1971 बनफूल 
1971 बिखरे मोती
1971 कारवाँ 
1971 चाहत 
1971 एक नारी एक ब्रह्मचारी 
1970 हिम्मत
1970 नया रास्ता 
1970 हमजोली
1970 मेरे हमसफर 
1970 खिलौना
1970 माँ और ममता 
1970 जवाब
1969 जीने की राह 
1969 बड़ी दीदी 
1969 वारिस 
1969 दो भाई 
1969 अनमोल मोती 
1969 जिगरी दोस्त
1969 विश्वास 
1969 धरती कहे पुकार के 
1968 परिवार 
1968 औलाद 
1968 सुहाग रात 
1968 मेरे हुज़ूर 
1967 बूँद जो बन गयी मोती 
1967 फर्ज़ 
1967 गुनाहों का देवता 
1964 गीत गाया पत्थरों ने

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