हुस्नलाल भगतराम (भारत की पहली संगीत कार जोड़ी)जन्म
हुस्न लाल 🎂8 अप्रैल 1920 ⚰️ 28 दिसंबर 1968 और भगत राम 🎂1914 ⚰️ 29 नवंबर 1973
हुस्न लाल और भगत राम बॉलीवुड के पहले महान संगीत निर्देशकों की जोड़ी थे। वे दो भाई हैं, हुस्न लाल (8 अप्रैल 1920 - 28 दिसंबर 1968) और भगत राम (1914 - 29 नवंबर 1973)।
नमस्कार स्वागत आप सब का रंगीला संसार पर कला की दुनिया में संगीत को कुदरत की सबसे पुरानी और बेहतरीन दिन कहा गया है संगीत सिर्फ सुनने में ही मीठा नहीं लगता बल्कि इससे हमारे मन की भावनाओं को उड़ान भरने का मौका भी मिलता है जब कोई हमारे कानों में बसती है तो हम किसी दूसरी दुनिया में होते हैं यह सच है किसी ने
कहा है गीत संगीत से अलग करके नहीं देखा जा सकता खासतौर पर जब हम भारतीय या हिंदी सिनेमा की बात करते हैं तो गीत संगीत की परंपरा किसी फिल्म की लोकप्रियता की सबसे बड़ी वजह प्रतीत होती है समझाया गया है कि जहां संवाद अदृश्य किरदार के भावों को प्रकट करने में अक्षम रहते हैं वहां गीत संगीत
अपनी भूमिका निभाते हैं नौटंकी के दौर से लेकर गंभीर सिनेमा के दौर तक गीत संगीत की इस पूरकता को सहेज कर रखा गया है आज हिंदी फिल्में भले ही तकनीकी प्रधान हो गई है लेकिन गीत संगीत से उनका रिश्ता अटूट है बॉलीवुड के इतिहास में बहुत से संगीतकार जोड़ी बनी जिन्होंने भारतीय संगीत जगत को एक से बढ़कर एक नायाब में दिए शंकर जयकिशन कल्याण जी आनंद जी लक्ष्मीकांत प्यारेलाल नदीम श्रवण के कुछ ऐसे नाम हैं जो भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमर हो चुके हैं लेकिन क्या कभी आपके दिमाग में यह बात आई कि इन से पहले बॉलीबुड
में संगीतकार जोड़ी कौन सी थी?
चलिए आज बात करते है। वोलीवुड की पहली संगीतकार जोड़ी हुस्नलाल भगतराम जी के बारे में जिन्होंने अपनी धुनों के जादू से श्रोताओं को मदहोश करने वाले कालजयी गीतों की
अर्चना की लेकिन समय के साथ ये दोनों गुमनामी के अंधेरे में कुछ इस तरह खो गए कि आज उन्हें कोई याद भी नहीं करता है
जबकि हिंदी फिल्मों में मोहम्मद रफी साहब को प्रारंभिक सफलता दिलाने में हुस्नलाल भगतराम का अहम योगदान रहा है चालीस के दशक के अंतिम वर्षों में जब मोहम्मद रफी साहब फिल्म जगत में बतौर प्लेबैक सिंगर अपनी पहचान बनाने में लगे हुए थे तो उन्हें काम नहीं मिलता था तब हुस्नलाल भगतराम
की जोड़ी ने उन्हें एक गैर फिल्मी गीत गाने का अवसर दिया था वर्ष उन्नीस सौ अड़तालीस में महात्मा गांधी की हत्या के बाद इस जोड़ी ने मोहम्मद रफी साहब को राजेन्द्र कृष्ण रचित गीत सुनो सुनो दुनिया वालो बापू की अमर कहानी गाने का अवसर दिया देशभक्ति के जज्बे से परिपूर्ण यह गीत श्रोताओं में काफी लोकप्रिय हुआ
संगीत के इतिहास में यह गीत मील का पत्थर था राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के निधन के तुरंत बाद यह गीत केवल चौबिस घंटे के रिकार्ड समय के भीतर हुस्नलाल भगतराम जी द्वारा संगीतबद्ध किया गया था इस रिकॉर्डिंग की दो अठहत्तर और पी डिस्क की सेट की एक लाख से अधिक प्रतियां एक महीने के भीतर बेची गई इस गीत के बाद
अन्य संगीतकार भी मोहम्मद रफी साहब की प्रतिभा को पहचान कर उनकी तरफ आकर्षित हुए और अपनी फिल्मों में उन्हें गाने का मौका देने लगे मोहम्मद रफी साहब हुस्नलाल भगत के संगीत बनाने के अंदाज से काफी प्रभावित थे और उन्होंने कई मौकों पर इस बात का जिक्र भी किया है रफी साहब सुबह चार बजे ही इस संगीतकार जोड़ी के घर पर
गाने को लेकर चले जाते थे जहां संगीत का रियाज करते थे हुस्नलाल भगतराम ने मोहम्मद रफी साहब के अलावा कई अन्य संगीतकारों को पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी सुप्रसिद्ध संगीतकार जोड़ी शंकर जयकिशन ने हुस्नलाल भगतराम से ही संगीत की शिक्षा हासिल की थी मशहूर संगीतकार लक्ष्मीकांत भी हुस्नलाल भगतराम से
वायलिन बजाना सीखा करते थे तो आइए जानते हैं इनके निजी जिंदगी के बारे में कि के संगीतकार बनने के सफर की शुरुआत कहां से हुई आपको बता दें कि हुस्नलाल भगतराम दोनों लोग सगे भाई थे बड़े भाई भगत राम का जन्म वर्ष उन्नीस चौदह में पंजाब के जालंधर जिले के गांव में हुआ था को लाल जी भी इसी गांव में जन्मे थे
उन्नीस सौ बीस में बचपन से ही दोनों का संगीत की ओर रुझान था हो भी क्यों न उनके पिता देवी चंद और बड़े भाई पंडित अमरनाथ जी चालीस के दशक के जाने माने संगीतकार थे खुशीलाल वायलिन और भगत राम हारमोनियम बजाने में रुचि रखते थे खुशीलाल लाल और भगत राम ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने भाई और संगीत
कार पंडित अमरनाथ से हासिल की इसके अलावा उन्होंने पंडित दिलीप सिंह बेदी से भी शास्त्रीय संगीत की शिक्षा हासिल की थी भूषण लाल जी ने उस्ताद बशीर खान से वायलिन बजाना सीखा था उस लालजी खयाल ठुमरी दादरा गजल और भजन गायकी में एक बेहतरीन गायक थे
कुशल मास्टर थे दोनों भाई अपने बड़े भाई पंडित अमरनाथ जी के साथ असिस्टेंट के रूप में काम किया करते थे
दीदी कश्यप फिल्म चार्ट बना रहे थे उन्होंने हुस्नलाल भगतराम सी के बड़े भाई पंडित अमरनाथ जी से इस फिल्म का संगीत देने को कहा अमरनाथ जी ने कहा कि मेरे पास तो वैसे ही बहुत काम है हम आपके साथ तो नहीं जा पाएंगे लेकिन आप मेरे छोटे भाई हुस्नलाल को ले जाइएऔर कॉन्ट्रैक्ट साइन कर लिया गया लेकिन जब मुंबई जाने की बारी आई
तोमर जी ने कहा कि मैं अपने भाई को अकेले नहीं भेजूंगा आप मेरे छोटे भाई भगत राम को भी साथ ले जाइए वो भी संगीत का अच्छा जानकार है दोनों मिलकर आपका काम कर देंगे बीडी कश्यप ने कहा ऐसा कैसे हो सकता है कांटेक्ट तो एक ही के साथ साइन हुआ है अमरनाथ जी ने कहा कोई बात नहीं आप उसी कांटेक्ट में दोनों
को ले जाइए और इस तरह बॉलीवुड संगीत जगत की पहली संगीतकार जोड़ी बनकर तैयार हुई हुस्नलाल भगतराम
फिल्म में उनके संगीतबद्ध गीत दो दिलों की दुनिया श्रोताओं में काफी लोकप्रिय हुआ लेकिन फिल्म की असफलता के कारण संगीतकार के रूप में हुए अपनी खास पहचान नहीं बना पाए
चालीस के दौरान संगीत निर्देशक शास्त्रीय संगीत की रात रागनी पर आधारित संगीत दिया करते थे हुस्नलाल भगतराम इसके पक्ष में नहीं थे उन्होंने शास्त्रीय संगीत में पंजाबी दोनों का मिश्रण करके एक अलग तरह का संगीत देने का प्रयास किया और उनका यह प्रयास
काफी सफल रहा वर्ष उन्नीस सौ अड़तालीस में प्रदर्शित फिल्म प्यार की जीत में अपने संगीतबद्ध गीत एक दिल के टुकड़े हजार हुए की सफलता के बाद हुस्नलाल भगतराम फिल्म जगत में अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गए मोहम्मद रफी की आवाज में कमर जलालाबादी द्वारा रचित गीत आज भी रफी साहब के दर्द भरे गीतों में विशिष्ट स्थान रखता
जेल के एक हज़ार में एक लिखें
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प्रेरणा हैं
लेकिन दिलचस्प बात यह है कि हुस्नलाल भगतराम ने यह गीत फिल्म प्यार की जीत के लिए नहीं बल्कि फिल्म सिंदूर के लिए संगीतबद्ध किया था सिंदूर के निर्माण के समय जब हुस्नलाल भगतराम ने फिल्म निर्माता शशधर मुखर्जी को सुनाया तो उन्होंने इसे अनुपयोगी बताकर फिल्म में शामिल करने से मना कर दिया बाद में
निर्माता ओ पी दत्ता ने इस गीत को अपनी फिल्म प्यार की जीत में इस्तेमाल किया वर्ष उन्नीस उनचास में प्रदर्शित फिल्म बड़ी बहन में अपने संगीतबद्ध गीत चुप चुप खड़े हो जरूर कोई बात है कि सफलता के बाद हुस्नलाल भगतराम फिल्म जगत में चोटी के संगीतकारों में शुमार हो गए
पॉप रॉक और पॉप
रोबोफार्म
इस इसकी से जुड़ा एक रोचक तथ्य यह है कि उस जमाने में गांव में रामलीला के मंचन से पहले दर्शकों की मांग पर इसे अवश्य बजाया जाता था लता मंगेशकर हो प्रेम लता की युगल आवाज़ों में रचे बसे इस गीत की तासीर आज भी बरकरार है साठ के दशक में
पाश्चात्य संगीत की चमक से निर्माता निर्देशक अपने आप को बचा नहीं सके और धीरे धीरे निर्देशकों ने हुस्नलाल भगतराम की ओर से अपना मुंह मोड़ लिया इसके बाद उसे लाभ दिल्ली चले गए और आकाशवाणी में काम करने लगे जबकि भगत राम मुंबई में ही रहकर छोटे मोटे स्टेज कार्यक्रम में हिस्सा लेने लगे जहां पर
पहली बजाया करते थे अपनी मधुर धुनों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने वाले हुस्नलाल अट्ठाईस दिसंबर उन्नीस वर्ष को इस दुनिया को अलविदा कह गए और नंबर उन्नीस सौ तिहत्तर में भगत राम जी भी इस दुनिया से चल बसी बड़े दुख की बात है कि ये दोनों महान संगीतकार अपनी मौत के समय गुमनामी के अंधेरों में रहे खुशी लाल जी का परिवार
दिल्ली में रहता है
राम जी के बेटे अशोक शर्मा दूरदर्शन के जाने माने सितार वादक हैं और परिवार के साथ मुंबई में रहते हैं
तो दोस्तों आज उसी संगीत जोड़ी हुस्नलाल भगतराम के प्रसिद्ध और लोकप्रिय संगीत निर्देशक हुस्नलाल को उनकी पुण्यतिथि पर याद करते हुए: एक श्रद्धांजलि और उनकी फिमोग्राफी भी देखे।
पंडित हुस्नलाल पंडित हुस्नलाल जन्म08 अप्रैल 1920 मृत्यु28 दिसंबर 1968
वह एक संगीत निर्देशक थे और उन्होंने अपने भाई भगतराम के साथ काम किया, हुस्नलाल भगतराम बॉलीवुड में संगीत निर्देशकों की शुरुआती जोड़ी में से एक थे।
हुस्नलाल का जन्म 🎂 08 अप्रैल 1920 को पंजाब के जालंधर जिले के कहमा गांव में हुआ था। हुस्नलाल एक निपुण वायलिन वादक और एक अच्छे शास्त्रीय गायक थे और उनके भाई भगतराम एक बेहतरीन हारमोनियम वादक थे।
🎬संगीत निर्देशक के रूप में हुस्नलाल भगताराम की फिल्मोग्राफी -
1944 चांद
1946 हम एक हैं और नरगिस
1947 हीरा, मोहन, रोमियो और जूलियट,
मिर्ज़ा साहिबान
1948 आज की रात, लखपति, प्यार की जीत
बापू की अमर कहानी और बांबी
1949 सावन भादो, बंसरिया, राखी,
जल तरंग, हमारी मंजिल, नाच
बालम, बड़ी बहन और अमर कहानी
1950 सूरजमुखी, प्यार की मंजिल, सरताज,
मीना बाजार, नागन, गौना
छोटी भाभी, अपनी छाया,
बिरहा की रात और आधी रात
1951 स्टेज, सनम, शगुन, अफसाना, राजपूत
1952 काफिला, राजा हरिश्चंद्र
1953 आंसू और फरमाइश
1954 शमा परवाना
1955 अदल-ए-जहाँगीर, कंचन
1956 मिस्टर चक्रम, आन बान, क्या बात है
1957 दुश्मन, जन्नत, कृष्ण सुदामा
1958 ट्रॉली ड्राइवर
1961 अप्सरा
1963 शहीद भगत सिंह
1965 टार्ज़न और सर्कस
1966 शेर अफगान
🎧 हुस्नलाल-भगतराम के प्रसिद्ध गीत -
● आजा मेरे बलमा बहाना कर के... नाच (1949) सुरैया द्वारा गाया गया
● आँखो का तारा प्राणों से प्यारा...आंसू (1963) लता मंगेशकर द्वारा गाया गया
● आंसू अब तुम कभी ना बहाना... काफिला (1952) लता मंगेशकर द्वारा गाया गया
● आप ने छीन लिया दिल...फ़रमाइश (1953) मोहम्मद द्वारा गाया गया। रफ़ी, मीना मंगेशकर
● आता है जिंदगी में... बलम (1949) सुरैया, मोहम्मद रफी द्वारा गाया गया
● ऐ चांद जरा सुन ले... प्यार की मंजिल (1950) लता मंगेशकर, हुस्नलाल द्वारा गाया गया
● ऐ मेरी जिंदगी तुझे ढूंढू... अद्ल-ए-जहांगीर (1955) तलत महमूद द्वारा गाया गया
● अलविदा अलविदा ओ जाने... शमा परवाना (1954) सुरैया द्वारा गाया गया
● अरे देने वाले या क्या जिंदगी दी...मीना बाजार (1950) मोहम्मद द्वारा गाया गया। रफी
● बहुत पुराना है ऐ सुननेवालों... बिरहा की रात (1950) मोहम्मद द्वारा गाया गया। रफी
● बेकरार है कोई... शमा परवाना (1954) मोहम्मद रफ़ी, सुरैया द्वारा गाया गया
● बिगाडी बनानेवाले बिगाडी बना दे... बड़ी बहन (1949) सुरैया द्वारा गाया गया
● चले जाना नहीं नैन मिलाके... बड़ी बहनें (1949) लता मंगेशकर द्वारा गाया गया
● चाँद सितारे कराटे इशारे... अद्ल-ए-जहाँगीर (1955) तलत महमूद द्वारा गाया गया
● छाया समा सुहाना हो छाया... नाच (1949) सुरैया, मोहम्मद रफी द्वारा गाया गया
● चुप चुप खड़े हो जरूर कोई बात है... बड़ी बहन (1949) प्रेमलता और लता मंगेशकर द्वारा गाया गया
● देख ली ओ दूनिया वाले... बलम (1949) सुरैया द्वारा गाया गया
● दिल तेरे आने से पहले भी यहीं बरबाद था... बड़ी बहनें (1949) सुरैया द्वारा गाया गया
● दिन प्यार के आये रे... आँसू (1963) मोहम्मद द्वारा गाया गया। रफी, लता मंगेशकर
● दो दिलो को ये दुनिया... चाँद (1944) मंजू द्वारा गाया गया
● दुनिया है बरबाद दिल की...मीना बाज़ार (1950) मोहम्मद रफ़ी, लता मंगेशकर द्वारा गाया गया
● जाके लागे नैना तो पाए नहीं चैन... शमा परवाना (1954) आशा भोसले, सुरैया द्वारा गाया गया
● लहरों से पूछ लो, या किनारों से पूछ लो... काफिला (1952) किशोर कुमार, लता मंगेशकर द्वारा गाया गया
● लूट गए हो प्यार में तेरे लूट गए हो... छोटी भाभी (1950) मोहम्मद रफ़ी द्वारा गाया गया
● मेरा दिलदार ना मिलाया... शमा परवाना (1954) सुरैया द्वारा गाया गया
● मेरी आई हैं तीन भाभी... हम एक हैं (1946) ज़ोहराबाई अम्बालेवाली, अमीरबाई कर्नाटकी द्वारा गाया गया
● मोहब्बत के धोखे में कोई ना आये... बड़ी बहनें (1949) मोहम्मद द्वारा गाया गया। रफी
● मोहे आता नहीं है चैन... फरमाइश (1953) सुलोचना कदम द्वारा गाया गया
● ना थमाते हैं आंसू...मीना बाजार (1950) मोहम्मद रफी द्वारा गाया गया
● ओ दूर जाने वाले... प्यार की जीत (1948) सुरैया द्वारा गाया गया
● ओ माही ओ माही ओ दुपट्टा मेरा दे दे... मीना बाजार (1950) मोहम्मद रफ़ी, लता मंगेशकर द्वारा गाया गया
● पास आके हुए हम दूर...मीना बाजार (1950) मोहम्मद रफ़ी, लता मंगेशकर द्वारा गाया गया
● प्यार में दो दिल मिले और... बलम (1949) सुरैया द्वारा गाया गया
● राखी का आया त्यौहार सखी...राखी (1949) शमशाद बेगम द्वारा गाया गया
● रुत रंगीली है सुहानी रात है... प्यार की जीत (1948) सुरिंदर कौर, मीना कपूर, सुरैया द्वारा गाया गया
● सपनों में आने वाले गलियों में आ जा एक बार... हम एक हैं (1946) ज़ोहराबाई अम्बालेवाली द्वारा गाया गया
● सारे महफ़िल जो जला परवाना... शमा परवाना (1954) मोहम्मद रफ़ी, सुरैया द्वारा गाया गया
● शामे बहार आई... शमा परवाना (1954) मोहम्मद रफ़ी, सुरैया द्वारा गाया गया
● सीने में आग भड़काती है... नाच (1949) सुरैया, मोहम्मद रफी द्वारा गाया गया
● सुन मेरे सजना रे... आँसू (1963) मोहम्मद द्वारा गाया गया। रफी, लता मंगेशकर
● सुनो ये जमाने की कहानी... आंसू (1963) मोहम्मद रफी द्वारा गाया गया
● तेरे नैनों ने छोरी क्या... प्यार की जीत (1948) सुरैया द्वारा गाया गया
● ठुकरा के हमें चल दिये... बलम (1949) मोहम्मद रफ़ी द्वारा गाया गया
● तू ही भरोसा... शमा परवाना (1954) सुरैया द्वारा गाया गया
● तुम हमें भूल गये.. बलम (1949) मोहम्मद रफ़ी द्वारा गाया गया
● तुम मुझको भूल जाओ..बड़ी बहन (1949) सुरैया द्वारा गाया गया
● तूने मेरा यार ना मिलाया... शमा परवाना (1954) मोहम्मद रफ़ी द्वारा गाया गया
● उल्फत के जाम पिला... शमा परवाना (1954) निर्मला देवी द्वारा गाया गया
● वो मेरी तरफ यूं चले आ रहे हैं... काफिला (1952) किशोर कुमार द्वारा गाया गया
● वो पास रहें या दूर रहें... बड़ी बहनें (1949) सुरैया द्वारा गाया गया
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